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रिजल्ट प्रतिशत कैलकुलेटर – मार्क्स से परसेंटेज कैसे निकाले

अपने अंकों (मार्क्स) को विषय-दर-विषय प्रतिशत में बदलें — डिवीज़न और CBSE वाले बेस्ट ऑफ़ 5 के साथ।

ये आम चलन हैं, CBSE या CISCE का आधिकारिक सर्कुलर नहीं। कौन-से विषय गिने जाएँगे, यह आपका कॉलेज या बोर्ड तय करता है।
भारत के आम चलन — आपका बोर्ड या विश्वविद्यालय अलग कट-ऑफ़ इस्तेमाल कर सकता है।
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यह टूल पूरी तरह आपके ब्राउज़र में चलता है। आप जो कुछ भी लिखते या अपलोड करते हैं, वह किसी सर्वर पर नहीं भेजा जाता।

परीक्षा और बोर्ड रिजल्ट के लिए मार्क्स प्रतिशत कैलकुलेटर

यह रिजल्ट प्रतिशत कैलकुलेटर आपकी रिपोर्ट कार्ड या मार्कशीट के अंकों (मार्क्स) को प्रतिशत में बदलता है। हर विषय के प्राप्त अंक और पूर्णांक (अधिकतम अंक) डालें, और आपको तुरंत हर विषय का प्रतिशत, कुल अंक, कुल प्रतिशत और आपकी डिवीज़न (श्रेणी) मिल जाती है। विषयों के पूर्णांक अलग-अलग हो सकते हैं — 100 अंक का थ्योरी पेपर और 50 अंक का प्रैक्टिकल, दोनों सही तरह गिने जाते हैं।

भारत में कई कॉलेज दाख़िले सभी विषयों के कुल की जगह बेस्ट ऑफ़ 5 प्रतिशत मानते हैं, इसलिए कैलकुलेटर आपके सबसे अच्छे पाँच विषय अपने-आप चुन सकता है, और चाहें तो अंग्रेज़ी (या जो विषय आप सबसे पहले लिखें) को पाँच में रख सकता है। पास अंक से कम वाले विषयों पर चेतावनी दिखती है, और सिर्फ़ एक जल्दी जवाब चाहिए तो प्राप्त अंक ÷ कुल अंक वाला आसान मोड भी है। “रिजल्ट का प्रतिशत कैसे निकाले” (result pratishat kaise nikale) — इसका पूरा तरीका नीचे उदाहरण के साथ है। यह ब्राउज़र में ही चलता है, कोई ऐप इंस्टॉल नहीं करना पड़ता।

रिजल्ट प्रतिशत कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें

  1. हर विषय अलग से डालने के लिए “विषय के अनुसार” चुनें, या अगर आपको कुल अंक पहले से पता हैं तो “कुल अंक” चुनें।
  2. हर विषय के लिए प्राप्त अंक और पूर्णांक टाइप करें (100 के लिए “पूर्णांक” खाली छोड़ दें)।
  3. अगर आपका कॉलेज या बोर्ड बेस्ट ऑफ़ 5 प्रतिशत मानता है तो “सिर्फ़ सबसे अच्छे N विषय गिनें” पर टिक करें, और तय करें कि पहला विषय हमेशा शामिल रहे या नहीं।
  4. अपने बोर्ड या विश्वविद्यालय से मेल खाता डिवीज़न का पैमाना चुनें।
  5. अपना प्रतिशत और डिवीज़न देखें, फिर विषय-दर-विषय सारांश के लिए “नतीजा कॉपी करें” दबाएँ।

रिजल्ट प्रतिशत कैलकुलेटर की खूबियाँ

विषय-दर-विषय सारणी

कुल के साथ हर विषय का प्रतिशत, ताकि आप देख सकें कि कौन-से विषय आपका कुल प्रतिशत बढ़ाते या घटाते हैं।

अलग-अलग पूर्णांक

हर विषय 100, 80, 50 या किसी भी संख्या में से हो सकता है; कुल प्रतिशत कुल अंकों से निकलता है।

CBSE वाला बेस्ट ऑफ़ 5

आपके सबसे अच्छे पाँच विषय अपने-आप चुनता है, साथ में अंग्रेज़ी या किसी और पहले विषय को हमेशा शामिल करने का विकल्प।

डिवीज़न और पास की जाँच

प्रथम, द्वितीय या तृतीय डिवीज़न (या क्लास), साथ में पास अंक से कम वाले किसी भी विषय पर चेतावनी।

कुल अंक वाला आसान मोड

सिर्फ़ एक प्रतिशत चाहिए तो प्राप्त अंक ÷ कुल अंक × 100।

अंकों का प्रतिशत कैसे निकाले — रिजल्ट प्रतिशत का फार्मूला

सभी विषयों के प्राप्त अंक जोड़ें, सभी पूर्णांक जोड़ें, पहले कुल को दूसरे से भाग दें और 100 से गुणा करें: प्रतिशत = कुल प्राप्त अंक ÷ कुल पूर्णांक × 100।

उदाहरण: अंग्रेज़ी 85, हिंदी 78, गणित 92, विज्ञान 66, सामाजिक विज्ञान 74 और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) 59, सभी 100 में से — कुल 600 में से 454, यानी 454 ÷ 600 × 100 = 75.67%। सबसे अच्छे पाँच विषय (IT हटाकर) 395 ÷ 500 × 100 = 79% देते हैं।

जब पूर्णांक अलग-अलग हों तो विषयों के प्रतिशत का औसत न निकालें: 40/50 (80%) और 45/100 (45%) का औसत 62.5% आता है, लेकिन सही प्रतिशत 85 ÷ 150 = 56.67% है।

डिवीज़न और क्लास (भारत में आम चलन)

बोर्ड और विश्वविद्यालय अपनी-अपनी कट-ऑफ़ तय करते हैं, इसलिए इस सारणी को सिर्फ़ गाइड मानें और अपनी मार्कशीट या नियमावली (ordinance) देखें।

नतीजास्कूल बोर्ड (आम तौर पर)विश्वविद्यालय (आम तौर पर)
डिस्टिंक्शन (Distinction)75% और उससे ज़्यादा75% और उससे ज़्यादा (कुछ जगह 70%)
प्रथम डिवीज़न / फ़र्स्ट क्लास60% – 74.99%60% – 74.99%
द्वितीय डिवीज़न / सेकंड क्लास45% – 59.99%50% – 59.99%
तृतीय डिवीज़न / पास क्लास33% – 44.99%40% – 49.99%
फ़ेल33% से कम40% से कम

बेस्ट ऑफ़ 5 और CBSE रिजल्ट

  • CBSE की मार्कशीट में हर विषय के अंक होते हैं; CBSE ख़ुद कोई कुल प्रतिशत या डिवीज़न घोषित नहीं करता। जिन कॉलेजों को इसकी ज़रूरत होती है, वे आम तौर पर बेस्ट ऑफ़ 5 प्रतिशत निकालते हैं।
  • इस टूल के प्रीसेट: CBSE तरीका पाँच विषय गिनता है और पहला विषय (अंग्रेज़ी) शामिल रखता है; ICSE तरीका अंग्रेज़ी और बाकी में से सबसे अच्छे चार गिनता है; स्टेट बोर्ड सभी विषयों का सीधा कुल लेता है; कस्टम में आप N ख़ुद तय कर सकते हैं, बेस्ट 3 से बेस्ट 6 तक। ये बहुत इस्तेमाल होने वाले चलन हैं, जिनकी पुष्टि हम CBSE या CISCE के किसी आधिकारिक सर्कुलर में नहीं कर पाए, इसलिए अपने साल के लिए अपने कॉलेज, बोर्ड या ISC/ICSE रिजल्ट नोटिस में लिखा नियम ज़रूर देखें।
  • संस्थानों के नियम अलग-अलग होते हैं: कुछ कोई भी पाँच विषय मान लेते हैं, कुछ किसी भाषा या ख़ास शैक्षणिक विषयों पर ज़ोर देते हैं। अगर कोई भाषा शामिल होनी ज़रूरी है, तो उसे सबसे पहले लिखें और “पहला विषय हमेशा शामिल करें” पर टिक लगा रहने दें।
  • CBSE में पास होने के लिए हर विषय में कम से कम 33% चाहिए (कक्षा 12 के प्रैक्टिकल वाले विषयों में थ्योरी और प्रैक्टिकल, दोनों में अलग-अलग 33% चाहिए)। स्कूल बोर्ड वाले पैमाने में यही पास लाइन इस्तेमाल होती है।
  • अगर आपके रिजल्ट में अंकों की जगह CGPA है, तो उसे CGPA to percentage converter से बदलें। सिर्फ़ एक प्रतिशत के सवाल के लिए प्रतिशत कैलकुलेटर ज़्यादा जल्दी है।

रिजल्ट प्रतिशत कैलकुलेटर: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रिजल्ट प्रतिशत कैसे निकाले (अंकों का प्रतिशत कैसे निकालते हैं)?

कुल प्राप्त अंकों को कुल पूर्णांक से भाग दें और 100 से गुणा करें। 500 में से 438 के लिए यह 438 ÷ 500 × 100 = 87.6% है। रिजल्ट प्रतिशत कैलकुलेटर यह हर विषय और आपके कुल अंकों, दोनों के लिए करता है।

बेस्ट ऑफ़ 5 प्रतिशत कैसे निकाला जाता है?

सबसे ज़्यादा अंक वाले अपने पाँच विषय चुनें, उनके अंक जोड़ें और उनके पूर्णांक (आम तौर पर 500) से भाग दें। कई कॉलेज चाहते हैं कि अंग्रेज़ी जैसी कोई भाषा उन पाँच में से एक हो, इसीलिए आप पहले विषय को लॉक कर सकते हैं।

फ़र्स्ट डिवीज़न कितने प्रतिशत पर आती है?

भारत के ज़्यादातर बोर्ड और विश्वविद्यालयों में 60% या उससे ज़्यादा फ़र्स्ट डिवीज़न (या फ़र्स्ट क्लास) है, और 75% या उससे ज़्यादा को अक्सर डिस्टिंक्शन कहा जाता है। सेकंड डिवीज़न आम तौर पर स्कूल बोर्ड में 45% से और विश्वविद्यालयों में 50% से शुरू होती है।

क्या कुल प्रतिशत के लिए विषयों के प्रतिशत का औसत निकालना चाहिए?

सिर्फ़ तब, जब हर विषय का पूर्णांक एक जैसा हो। अगर अलग-अलग हैं, तो अंक जोड़ें और कुल पूर्णांक से भाग दें, जैसा यह कैलकुलेटर करता है।

क्या प्रैक्टिकल और इंटरनल अंक गिने जाते हैं?

हाँ, अगर वे आपकी मार्कशीट पर विषय के कुल में शामिल हैं। विषय के लिए मिले-जुले अंक (थ्योरी + प्रैक्टिकल या इंटरनल) और मिला-जुला पूर्णांक डालें।

क्या मेरा डेटा सेव होता है?

आपके विषय सिर्फ़ आपके ब्राउज़र में रखे जाते हैं, ताकि लौटने पर वे वहीं मिलें। कुछ भी अपलोड नहीं होता।

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